मधुबन में सांसद राजीव राय के सामने खुली दो लेखपालों की कलई

22 Aug 2024

- बिनटोलिया में कटान पीड़ितों को आवंटित जमीन भी नहीं दे सका प्रशासन
- सिंचाई विभाग के अफसरों ने भी बताई सरकार से सहयोग न मिलने की व्यथा

मऊ : घोसी का सांसद निर्वाचित होने के बाद संसद से लेकर संसदीय क्षेत्र की जनता के बुनियादी सवालों को लेकर मुखर राजीव राय गुरुवार को बारिश के बीच जा पहुंचे मऊ जनपद के आखिरी गांव बिनटोलिया। यह गांव घाघरा (सरयू) नदी के तट पर है और हर साल बाढ़ की विभीषिका में बहुत कुछ गंवा देता है। सांसद के सामने गांव के लोगों ने अपनी व्यथा तो बताई ही, दो लेखपालों विवेक राय और आशुतोष पांडेय के भ्रष्टाचारी रूप को उजागर किया। पूर्व में बाढ़ में मकान व जमीन गंवा चुके लोगों को भूमि आवंटित करने का सरकार ने ढिंढोरा पीटा, लेकिन सच्चाई यह सामने आई कि किसी को भी जमीन हैंडओवर नहीं की गई। इतना ही नहीं लोगो ने यह भी शिकायत किया कि उक्त दोनों लेखपालों को जिसने रिश्वत दी, उन्हीं को जमीन पट्टा किया। सिंचाई विभाग के अफसरों ने भी तीन साल से बाढ़ से राहत व बचाव के लिए भेजे जा रहे प्रपोजल को सरकार द्वारा स्वीकृत न करने की व्यथा सुनाई।

सबसे पहले मिले बाढ़ पीड़ितों से 

घोसी लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजीव राय मधुबन विधानसभा क्षेत्र के बाढ़ग्रस्त बिनटोलिया में  बाढ़ प्रभावित लोगों से मिले। उनका हाल जाना। वहां की स्थिति का जायजा लिया। लोगों का दर्द सुनने के बाद कहा कि यह मेरे लिए काफी पीड़ादायक है। वह कुछ वर्ष पहले यहां आए थे, जब यहां कटान हो रही थी और गांव के गांव डूब रहे थे। लोगों को रहने के लिए जगह नहीं थी। वह कुछ लोगों के लिए खाद्य सामग्री एवं तिरपाल लेकर आए थे। उस खबर को मीडिया द्वारा दिखाने के बाद प्रशासन मीडियाकर्मियों के ही पीछे पड़ गया था। मीडियाकर्मियों के पीछे पड़ने की घटना को भाजपा सरकार चलाने का निचला स्तर कहा जायेगा।

सरकार को बताया अंधी, गूंगी और बहरी

सांसद राय ने बताया कि आज की स्थिति यह है कि वह सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाए थे। इसके पीछे उनकी मंशा थी कि यदि विभागीय अफसर कोई काम नहीं कर रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखूंगा, लेकिन यहां दोष अफसरों का नहीं, बल्कि भाजपा सरकार का निकला। सिंचाई विभाग के अफसरों ने बताया कि इस क्षेत्र को बचाने के लिए लगातार तीन साल से प्रपोजल भेजा जा रहा है। राजीव राय ने कहा की अंधी, गूंगी और बहरी सरकार जो जुमले में ज्यादा यकीन रखती है उसके कान पर जूं नहीं रेंग रहा है। हमने बाढ़ पीड़ितों का मसला संसद में भी उठाया था कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के लोग अभी भी बेघर हैं। कुछ लोगों को पट्टा पर जमीन भी मिली थी लेकिन आज भी वह उनको हैंडओवर नहीं हो पाई है।

प्रोजेक्ट स्वीकृत न होना दुर्भाग्यपूर्ण

राजीव राय ने कहा कि अगर सरकार की आप कमी दिखाएंगे तो आपके ऊपर मुकदमा सहित अन्य कार्रवाई करेंगे लेकिन आज वह सांसद के रूप में आए हैं। देखते हैं सरकार क्या कार्रवाई करती है। वह प्रशासन से बात करेंगे। इस विभाग के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को वह गंभीर मंत्री समझते हैं। यदि इस तरीके के मामले को वह तीन साल से गंभीरता से नहीं ले रहे हैं तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। इस प्रोजेक्ट को स्वीकृत न करने में किन अधिकारियों का हाथ रहा उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। सांसद ने कहा कि अभी 25 लोग यहां मिले हैं जिनका घर बनाने के लिए अब तक जमीन का अलॉटमेंट ही नहीं मिला। कितनी मेहनत लगती है घर बनाने में और जिनका बना हुआ घर पानी में समाहित हो जाए उनके ऊपर क्या बितती होगी यह वही जान सकता है।

मुख्यमंत्री से दागा सवाल

राजीव राय ने यह भी कहा कि इस संदर्भ में वह मुख्यमंत्री से भी अनुरोध करेंगे कि आपके पड़ोस का जिला है। कम से कम इतनी तो संवेदनशीलता होनी चाहिए कि आपकी सरकार के पास तीन साल से प्रपोजल जा रहा है और स्वीकृत नहीं हो रहा। सवाल किया कि मुख्यमंत्री की कौन सी विवशता है कि बाढ़ पीड़ितों के लिए कार्य नहीं हो रहा है। आखिर क्यों मेरे इलाके के लोगों को आप लोग मारना चाह रहे हैं। इसकी जवाबदेही तो सरकार की बनेगी ही। ज्ञात हो कि सांसद राजीव राय विगत लोकसभा की कार्रवाई के दौरान संसद में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की दयनीय स्थिति के मामले को उठा चुके हैं।



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