मऊ के लाल : पिता ने पढ़ाया, असिस्टेंट कमिश्नर बन अरविंद ने मान बढ़ाया 

06 Jun 2022

---बुलंद आवाज विशेष---
-वाराणसी में इनकम टैक्स के इन्वेस्टीगेशन सेल में संभाल रखी है कमान, रखते हैं कर चोरों पर नजर
-हलवाई बलिराम चौहान ने खुद की उच्च शिक्षा हासिल न कर पाने की भरपाई मझले बेटे से कराई
-बीएचयू से बीएससी, जेएनयू से एमए-एमफिल के बाद पीएचडी में दाखिला लेते ही मिली नौकरी    

बृजेश यादव 
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मऊ : बुलंद आवाज
के साप्ताहिक कालम मऊ के लाल में आज हम आपको परिचित करा रहे हैं अरविंद चौहान से। अरविंद चौहान वह शख्सियत हैं, जिनका ताल्लुक तो सामान्य परिवार से है, लेकिन आइआरएस का कंपटीशन क्वालीफाई कर उन्होंने मुकाम बड़ा हासिल किया। हलवाई पिता ने उन्हें खुद संघर्ष कर पढ़ाया तो उन्होंने भी इनकम टैक्स में असिस्टेंट कमिश्नर बनकर उनका मान बढ़ाया। वाराणसी के इन्वेस्टीगेशन सेल में तैनात अरविंद की नजर टैक्स चोरी कर देश के राजस्व को चूना लगाने वालों पर रहती है। बेटे की सफलता से खुश बलिराम चौहान अब अपना जीवन सार्थक मानते हैं। उन्होंने अपनी भी उच्च शिक्षा की कमी की भरपाई मझले बेटे को शीर्ष संस्थानों में पढ़ाकर पूरी की। अरविंद ने बीएचयू व जेएनयू जैसे विश्व विख्यात विश्वविद्यालयों से शिक्षा हासिल करने का सौभाग्य हासिल किया।
इंजीनियरिंग की तरफ था झुकाव   
सिविल सर्विसेज इक्जाम में सफलता हासिल करने वाले अरविंद चौहान ने पहले अपना लक्ष्य इंजीनियर बनने का बनाया था। यही वजह थी कि उन्होंने इंटरमीडिएट करने के बाद एक साल तक इंजीनियरिंग कंपटीशन की तैयारी की थी। बाद में उन्होंने सिविल सर्विसेज इक्जाम पर फोकस किया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में उन्होंने 2009 में दाखिला लिया। वर्ष 2012 में बीएससी आनर्स की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वह एमए करने जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) चले गये। वहां से एमए व एमफिल की पढ़ाई पूरी की।
पीएचडी की आस रह गई अधूरी 
एमफिल करने के बाद अरविंद चौहान ने पीएचडी करने का मन बनाया, लेकिन वह आस पूरी नहीं हो सकी। एमफिल की पढ़ाई के दौरान ही वर्ष 2017 में उन्होंने सिविल सर्विसेज के इक्जाम में शामिल होने के लिये आवेदन कर दिया। प्री व मेन परीक्षा क्वालीफाई करने के बाद उन्होंने इंटरव्यूह में भी प्रतिभाग किया। रिजल्ट आने में विलंब होते देख उन्होंने अध्ययन जारी रखने के लिये पीएचडी में दाखिला लिया। वह पीएचडी करना शुरु ही किये थे कि 26 अप्रैल 2018 को सिविल परीक्षा का रिजल्ट आ गया। उसमें उनका चयन आइआरएस के रुप में हो चुका था। उन्होंने पीएचडी का शोध बीच में ही छोड़ दिया और ट्रेनिंग में चले गये। 
राजधानी में पहली पोस्टिंग 
यूपीएससी का कम्पटीशन क्वालीफाई कर इनकम टैक्स के असिस्टेंट कमिश्नर बने अरविंद चौहान ट्रेनिंग करने के लिये महाराष्ट्र के नागपुर प्रशिक्षण केंद्र गये। वहां उनके पद व दायित्व का बोध कराने के साथ ही इनकम टैक्स चोरी करने वालों पर ऐक्शन लेने की हर पेंचीदगी से अवगत कराया गया। 20 माह के प्रशिक्षण में जब उनका बैच दक्ष हो गया तो उनकी पहली पोस्टिंग सूबे की राजधानी लखनऊ में हुई। वहां बमुश्किल चार माह ही उन्हें कार्य करने का अवसर मिला। इसके बाद अक्टूबर 2021 में उनका तबदला असिस्टेंट कमिश्नर पद पर ही वाराणसी के लिये हो गया। वहां वह अब तक कार्यरत हैं। 
पकड़ते हैं लेखा-बही की गड़बड़ी 
अरविंद चौहान से उनके कार्य के बाबत बुलंद आवाज ने जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि उनकी टीम कर चोरी के लिये लेखा-बही में की जाने वाली गड़बड़ियों को पकड़ती है। कर चोरी करने वालों पर पेनाल्टी लगाई जाती है। किसी द्वारा इनकम टैक्स रिर्टन फाइल दाखिल करने पर कर चोरी की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच की जाती है। विशेष मामलों में न्यायालय के जरिये मुकदमा दर्ज कराने की भी कार्रवाई की जाती है। 
देव पब्लिक स्कूल में हुई प्रारंभिक शिक्षा 
अरविंद का जन्म 14 नवंबर 1990 को गाजीपुर जिले के माहपुर क्षेत्र के हिरानंदपुर में हुआ, लेकिन पिता के काम के सिलसिले में मऊ आ बसने के चलते अब इनका परिवार शहर के सहादतपुरा नई बस्ती का हो गया है। वह बलिराम चौहान के तीन पुत्रों में मझले हैं। पिता व उनके बड़े भाई आजमगढ़ मोड़ के समीप चंद्रज्योति स्वीट्स नामक मिष्ठान की दुकान का संचालन करते हैं। अरविंद की कक्षा से एक से आठ तक की पढ़ाई मुहल्ले में ही स्थित देव पब्लिक स्कूल में हूई। वर्ष 2006 में हाईस्कूल व 2008 में इंटरमीडिएट इन्होंने केंद्रीय विद्यालय मऊ से उत्तीर्ण किया। आगे की शिक्षा के बीएचयू व जेएनयू से ग्रहण किया। 



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