घोसी उपचुनाव : दिन-ब-दिन मजबूत हो रहे दारा

31 Aug 2023

- भाजपा से टिकट मिलने के बाद सवर्ण मतदाताओं में पनपे रिएक्शन को मंत्रियों की फौज ने किया दूर
-विकास की बात कोसों दूर, अपनी-अपनी बिरादरी के मतदाताओं को बीजेपी के पाले में करने को उतरे मंत्री
-डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने ब्राह्मण मतदाताओं के घर-घर जाकर मांगा वोट, जगह - जगह लगाई चौपाल
-दूसरे डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने किया घोसी का तीन बार दौरा, सूर्यप्रताप शाही व एके शर्मा ने भूमिहारों को सहेजा
-दारा सिंह चौहान के पक्ष में सजातीय मतदाता लामबंद, ओमप्रकाश राजभर व संजय निषाद घूमे भर व निषाद बस्ती
-राजपूत मतदाताओं का सुधाकर सिंह के पक्ष में रुझान, योगी के आने के बाद उनके भी जुड़ जाने की बीजेपी को आस
-सपा मुखिया अखिलेश यादव, राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव और रामगोपाल यादव ने सीट जीतने को लगाई ताकत

बृजेश यादव

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मऊ : घोसी विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, लड़ाई का रुख स्पष्ट होता चला जा रहा है। समाजवादी पार्टी की विधायकी से इस्तीफा देकर इसी सीट से दल बदल करने वाले दारा सिंह चौहान को बीजेपी ने जब टिकट दिया तो रिएक्शन की ऐसी हवा उठी जैसे लगा कि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सुधाकर सिंह की एकतरफा जीत हो जाएगी और दारा की जमानत जब्त हो जाएगी। 2022 के आम चुनाव में समाजवादी पार्टी के मतदाताओं द्वारा बहुमूल्य वोट देकर दारा को विधायक बनाने का भी आक्रोश फील्ड में निकले भाजपा प्रत्याशी पर सपा कार्यकर्ता द्वारा स्याही फेंकने के रूप में भी सामने आया। दारा सिंह चौहान को बीजेपी से प्रत्याशी बनाए जाने के बाद उसके परंपरागत मत सवर्णों में बगावत की लहर उठने लगी तो भाजपा के स्थानीय नेताओं ने इसकी रिपोर्ट ऊपर भेजी।

सबक सिखाने की बात करने वालों के बदले सुर

रिपोर्ट मिलने के बाद भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने घोसी विधानसभा क्षेत्र में यूपी के दोनों डिप्टी सीएम समेत दर्जन भर से अधिक मंत्रियों की फौज उतार दी। हर जाति बिरादरी के मंत्री घोसी में आ धमके और अपनी अपनी बिरादरी के मतदाताओं का रिएक्शन कम कर उन्हें भाजपा के पक्ष में वोट करने को सहेजने में लग गए। आम कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर भोजन किया। नाराज कार्यकर्ताओं के घर तक गए। इसका असर यह देखने को मिल रहा है कि दारा के दल बदल करने और भाजपा के टिकट देने के बाद हुआ रिएक्शन काफी हद तक दूर हो चुका है। शुरुआत में जो भाजपा कार्यकर्ता, समर्थक या मतदाता दारा को हराकर सबक सिखाने की बात करने लगे थे उनका सुर बदल सा गया है। वह अब इस चुनाव को 2024 के लोकसभा चुनाव के पूर्व इंडिया और एनडीए गठबंधन के बीच लड़ाई का रिहर्सल मानकर लोगों को कमल के फूल पर वोट करने को प्रेरित करने में लग गए हैं।

मुस्लिम मतों के एकतरफा होने से मजबूती स्थिति में सपा

उधर समाजवादी पार्टी ने भी पूरी ताकत झोंक रखी है। 2022 के आम चुनाव में अपनी जीती हुई सीट को बचाने के लिए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी जनसभा कर चुके हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव और रामगोपाल यादव भी चौपाल, नुक्कड़ सभाएं कर व घर-घर जाकर चार-पांच दिन तक क्षेत्र में लोगों को समाजवादी पार्टी के साइकिल निशान पर वोट करने को जोड़ने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो पिछले कई चुनावों में सुधाकर को वोट न देने वाले यादव मतदाताओं को सपा के दिग्गज इस बार उनके पक्ष में लामबंद करने में कामयाब हो चुके हैं। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी के कैंडिडेट के मैदान में इस बार न होने के चलते मुस्लिम मतों को 100% अपने से जुड़ा मान रहे हैं। यही नहीं सुधाकर सिंह के बिरादरी के लगभग 8 हजार मतदाताओं में ज्यादातर का रुझान अभी तक सपा के ही पक्ष में बना हुआ है लेकिन दारा की लड़ाई दिन-ब-दिन मजबूत होने के चलते सपा केवल मुस्लिम, यादव और ठाकुर मतों से किला फतह नहीं कर सकती। अन्य मतों को जोड़ने में काफी संघर्ष करना होगा।

सूर्य प्रताप शाही संग मनोज राय व उत्पल उतरे मैदान में

दारा सिंह चौहान को टिकट दिए से जाने से नाराज कार्यकर्ताओं का रुख देखकर स्थानीय भाजपा के प्रभावशाली नेता कई दिन तक प्रचार से परहेज किए। कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने जिले में दस्तक देने के साथ ही जनपद के दो प्रभावशाली भूमिहार नेताओं जिला पंचायत अध्यक्ष मनोज राय और उत्पल राय को अपने साथ लिया। वह इन दोनों नेताओं के साथ घोसी विधानसभा क्षेत्र में की हर भूमिहार बस्ती में गए। पहले कार्यकर्ताओं और मतदाताओं की नाराजगी सुनी फिर उन्हें मोदी और योगी की प्रतिष्ठा का हवाला देते हुए दारा को कमल के फूल के निशान पर वोट देने को राजी किया। यह भी बताया कि 2024 में दारा सिंह चौहान और ओमप्रकाश राजभर भाजपा के लिए क्यों जरूरी हैं? सूर्यप्रताप शाही ने मनोज राय और उत्पल राय को भूमिहार बाहुल्य कुछ गांव के बूथों को जीतने की जिम्मेदारी भी दी।

गृह जनपद में पूरी ताकत झोंक रखे हैं एके शर्मा 

इसके अलावा जिले के ही रहने वाले ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने भी भूमिहार मतदाताओं के घर-घर दस्तक दी। दारा के प्रति रिएक्शन को दूर करने की उन्होंने भी पुरजोर कोशिश की। वह इस उपचुनाव को बीजेपी की प्रतिष्ठा से जुड़ा चुनाव मानकर अभी भी पूरी ताकत व ऊर्जा के साथ क्षेत्र में लगे हुए हैं। अपनी बिरादरी के दिग्गज नेताओं के घर-घर आने के बाद भूमिहार मतदाताओं का रिएक्शन काफी हद तक दूर होता दिखने लगा है। यह अलग बात है कि 5 सितंबर को मतदान के दिन रिएक्शन तभी दूर माना जाएगा जब दारा के पक्ष में लोग मतदान करें।

उमेश पांडेय व रमेश दुबे संग डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दी दस्तक

भारतीय जनता पार्टी ने ब्राह्मण मतदाताओं के बीच हुए रिएक्शन को दूर करने के लिए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को मैदान में उतारा। यही नहीं समाजवादी पार्टी से मधुबन से 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ चुके  उमेश चंद पांडेय को अपने दल में शामिल कराया। उमेश चंद पांडेय की सुधाकर सिंह से दुश्मनी भी चलती है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी में दो दशक से भी अधिक समय तक सेवा करने वाले विभिन्न पदों पर रह चुके रमेश दुबे ने भी उपचुनाव के समय पाला बदलकर भाजपा की सदस्यता ले ली। घोसी विधानसभा क्षेत्र में 5 दिन पूर्व दस्तक देने के साथ ही डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने उमेशचंद पांडेय और रमेश दुबे के साथ अमूमन प्रत्येक ब्राह्मण बस्तियों का दौरा किया। वहां चौपाल लगाई। लोगों की दारा के प्रति नाराजगी को कन्वर्ट कर भाजपा के पक्ष में फिर से वोट देने को सहमत किया। वह पार्टी कैंडिडेट की तरह घर-घर जनसंपर्क में भी लगे हुए हैं। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, गिरीश चंद्र यादव, दया शंकर सिंह समेत तमाम मंत्रियों ने अपने-अपने सजातीय मतों में भाजपा की स्थिति मजबूत करने का प्रयत्न किया। 

दलित मतदाताओं को पक्ष में करने को कर रहे पूरा जतन

भाजपा के फायर ब्रांड नेता और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी इस उप चुनाव में तीन बार घोसी विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने दो जनसभाएं भी की। समाजवादी पार्टी को समाप्तवादी पार्टी की संज्ञा देते हुए कुछ ऐसा भी कटाक्ष किया जिसको लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राजीव राय और अन्य नेताओं ने उनको मुंहतोड़ जवाब भी दिया। बहुजन समाज पार्टी के इस बार प्रत्याशी न उतारने के बाद मुस्लिम मतों की सपा के प्रति लामबंदी को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज दलित मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का सारा जतन करने में जुटे हैं। इसके अलावा भाजपा गठबंधन दल के हिस्सा हो चुके सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर, कैबिनेट मंत्री संजय निषाद अपने-अपने सजातीय मतों को लामबंद कर दारा की स्थिति को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी के एक बड़े नेता की माने तो अभी तक जो राजपूत मतदाता सुधाकर सिंह की तरफ हैं आने वाले एक-दो दिन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यक्रम लगने के बाद उनमें से भी ज्यादातर भाजपा के पक्ष में लामबंद हो जाएंगे।

दोनों दल के दिग्गज कर रहे 30 से 40 हजार से जीत का दावा

भारतीय जनता पार्टी इस सीट को 30 से 40 हजार मतों से जीतने का दावा कर रही है और इतने ही मतों से फतह हासिल करने का समाजवादी पार्टी के भी नेता दावा कर रहे हैं। यह तो 8 सितंबर को मतगणना के बाद पता चलेगा कि किसके दावे में कितना दम है। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि घोसी विधानसभा क्षेत्र के इस उपचुनाव में भी एक बार फिर जातिगत फैक्टर हावी है। विकास की बात कोसों दूर चली गई है। शुरुआती समय में लड़ाई से बाहर दिखने वाले दारा दिन-ब-दिन जैसे-जैसे मजबूत होते जा रहे हैं वैसे-वैसे भाजपा नेताओं और उनके समर्थकों में उत्साह बढ़ता जा रहा है। विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सुधाकर सिंह और पार्टी के लोग दारा की मजबूती न बन पाए इसकी काट तलाशने में जुटे हुए हैं।



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