कविता : घरौंदा बनाया जाए 

04 May 2022

आओ मिलकर बिस्मिल हमीद के सपनों का खूबसूरत घरौंदा बनाया जाए,
गिले-शिकवे मिटाकर, गले मिलकर, होली दिवाली ईद सब मनाया जाए,
दुश्मनी, दगाबाजी और नफरत के हर खंजर को हर दिल से मिटाया जाए।  

अब जख्म को जख्म से नहीं बल्कि प्यार-मुहब्बत से मिटाया जाए,  
खुली फिज़ाओं को गेंदा, गुलाब, गुड़हल केसर की खुशबूओं से महकाया जाए,  
मतलबपरस्ती, दौलतपरस्ती और शोहरतपरस्ती सियासत को ख़ाक में मिलाया जाए।  

अब ईमानपरस्ती, अमनपरस्ती और वतनपरस्ती के गीत-गजल गुनगुनाया जाए, 
जाति-धर्म, ऊँच-नीच, अमीर-गरीब, रंग-रूप नस्ल का तफरका मिट्टी में मिलाया जाएं,
समता, ममता, दया, करूणा, परोपकार की गंगा हर दिल में बहाया जाए। 
प्रस्तुति : मनोज कुमार सिंह, 
प्रवक्ता बापू स्मारक इंटर कॉलेज दरगाह, मऊ।



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