राजनीतिक का सच उकेरती कविता... भचर-भचर भड़काऊ भाषण से भाईचारा तोड़ रहे हैं नेताजी 

12 Feb 2022

चुनाव दर चुनाव जनसेवा की दुहाई देकर,
नींबू की तरह जी भरकर जनता को निचोड़ रहे हैं नेताजी। 
काम-धाम कुछ नहीं, घूम-फिरकर 
जाति-बिरादरी की इकाई दहाई सैकड़ा जोड रहे हैं नेताजी। 
जनता जाए भांड़ में, कानून रख कर ताख पर,
भचर-भचर भड़काऊ भाषण से भाईचारा तोड़ रहे हैं नेताजी। 

सूझ-बूझ समझदारी से कोसों दूर हैं 
पर हर समस्या का ठीकरा एक दूसरे पर फोड़ रहे हैं नेता जी,
चेहरा चमका रहे हैं कमीशन वाली मलाई खूब चाभकर,
पर मंहगाई बढ़ाकर जनता की कमर तोड़ रहे हैं नेता जी।

नकली मुद्दा ,नकली नारा, गिरगिटिया चाल,
जरूरी जमीनी और असली मुद्दों से मुंह मोड़ रहे हैं नेताजी। 
चुनाव आते ही मेघा की तरह उपरा गये लाव-लस्कर लेकर,
घड़ियाली आंसू लेकर आंख में चौखट-चौखट फिर हाथ जोड़ रहे हैं नेता जी।

हर बार की तरह जनता को अनपढ़ गंवार समझकर,
फिर लम्बे-लम्बे वादों की फुलझड़ी छोड़ रहे हैं नेताजी।
टिकट पा गए दौलत के दम पर या जोड़-तोड़ कर,
फिर गाँव-गाँव गली-गली हर पगडंडी दौड रहे हैं नेताजी। 

प्रस्तुति : मनोज कुमार सिंह प्रवक्ता 
बापू स्मारक इंटर कॉलेज दरगाह मऊ।

 



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