मऊ में राजीव राय से लिपटकर रो पड़े शंकर

22 Jan 2022

---मानवता की मिसाल---
-पांच दिन पहले अगलगी में गुमटी में संचालित किराना की दुकान हो गई खाक
-सपा के राष्ट्रीय सचिव ने अभिभावक की तरह दिया दिलासा, की आर्थिक मदद
-बेसहारा हो चुके परिवार को ऐन मौके पर की गई मदद बन सकेगी बड़ा सहारा 

बृजेश यादव 
------------
मऊ :
गरीब-गुरबों के लिये ईश्वर के दूत बन चुके राजीव राय को अपने बर्बाद हो चुके ठिकाने पर देखते ही शंकर राजभर लिपटकर भोंकर-भोंकर रो पड़े। उनका बेटा भी उन्हें पकड़कर रोने लगा। दोनों बाप-बेटों को अभिभावक की तरह पीठ सहलाते हुए समाजवादी पार्टी के सचिव व प्रवक्ता ने दिलासा दिया। खुद भी भावुक हो गये। उनको चुप कराने के बाद उनसे उनकी पीड़ा सुनी। उनको रोजगार की राह फिर से पकड़ाने के लिये बंद मुट्ठी से आर्थिक मदद की। बेसहारा हो चुके शंकर के परिवार को ऐन मौके पर की गई यह मदद बहुत बड़ा सहारा नजर आई। इस कदर आत्मविश्वास दिखा कि इस सहायता से उनका परिवार फिर अपनी किराना की दुकान चालू कर अपने पैरों पर खड़ा हो सकेगा। पूरा परिवार आजीवन इस सहायता के लिये सपा नेता के प्रति ऋणी दिखा। राजीव राय ने गुमटी की मरम्मत कराकर पुनः दुकान शुरु करने को प्रेरित करते हुए आश्वासन दिया कि आवश्यक हुआ तो आगे और मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि उनके रहते इस परिवार के समक्ष भूखों मरने की नौबत नहीं आएगी। 
पेट-पर्दा का एकमात्र सहारा थी दुकान 
घोसी विधानसभा क्षेत्र के कसारा में भजहवां निवासी शंकर राजभर ने गुमटी में किराना की दुकान खोल रखी थी। इसी दुकान से होने वाली आय से उसके पूरे परिवार का पेट-पर्दा चलता था। पांच दिन पहले रात के समय अज्ञात कारण से उसकी दुकान में आग लग गई। अगलगी में बिक्री को रखे गये खाद्य पदार्थ समेत समूची दुकान जलकर राख के ढेर में तब्दील हो गई। इस बर्बादी से उसका पूरा परिवार सदमे में चला गया था। चार दिन तक कोई भी मदद को आगे नहीं आया तो उनका मनोबल पूरी तरह से टूट गया था। 
राजधानी में ही कर लिया निश्चय 
शंकर की दुकान में जब अगलगी की घटना हुई तो सपा सचिव राजीव राय उस समय राजधानी में थे। यह खबर जब उन्हें लगी और शंकर के पूरे परिवार के समक्ष रोजी-रोटी का संकट आने की बात प्रकाश में आई तो वह मर्माहत हो गये। उन्होंने किसी से कुछ कहा तो नहीं, लेकिन मन ही मन निश्चय कर लिया कि मऊ पहुंचते ही सबसे पहले शंकर की मदद करनी है। 
चर्चा में नहीं लगा सपा सचिव का मन 
जिले में आने के बाद राजीव राय के सहादतपुरा स्थित आवास पर शनिवार की सुबह समर्थकों का जमावड़ा होने लगा। लोग प्रदेश की राजनीति व चुनाव को चर्चा करने लगे। राजीव राय उनकी बातों पर न गौर फरमा रहे थे और न ही कोई दिलचस्पी ले रहे थे। पूर्व जिलाध्यक्ष शिवप्रताप यादव मुन्ना, धीरज राजभर, प्रभात राय समेत तमाम समर्थक उनके चेहरे पर उभरे भाव को पढ़ने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान राजीव राय ने अपने चालक को बुलाया और गाड़ी लगाने को कहा। 
घंटे भर से कम समय में पहुंच गये कसारा 
चालक को सहेजने से सबको यह तो लगा कि वह कहीं निकलने वाले हैं, लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं हो सका कि कहां जाने वाले हैं। कुछ देर बाद वह गाड़ी में बैठे तो उनके समर्थक भी अपनी गाड़ी में सवार हो गये। चालक को वह खुद रुट बताते गये। घंटे भर से भी कम समय में वह कसारा में वहां जा पहुंचे, जहां शंकर राजभर की जल चुकी दुकान थी। वहां गाड़ी से उनके उतरने के बाद सबको समझ में आया कि आवास पर उनके दिमाग में आखिर क्या चल रहा था। 
उजड़ चुकी बगिया में आया देख रहा हतप्रभ 
उधर राजीव राय को अपने उजड़ चुकी बगिया में आया देख शंकर हतप्रभ रह गया। राजीव राय के कदम जब उसकी बर्बादी की दास्तां देखने को बढ़े तो वह भागता सा उनके करीब आकर लिपट गया। उसके बिलख-बिलख रोने से राजीव राय भी भावुक हो गये, लेकिन उन्होंने खुद पर काबू करते हुए उसकी पीठ सहलाकर ढांढ़स बंधाया। उसकी गुमटी की मरम्मत कराकर फिर से रोजगार शुरु करने को आर्थिक मदद दी। हर तरफ से निराश हो चुका शंकर व उसका परिवार अश्रुपूरित नेत्रों से इस मदद के लिये कृतज्ञता जाहिर किया। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि भगवान के दूत बनकर राजीव भईया उनके बीच आएंगे और फिर से जीवन की गाड़ी को पटरी पर लाने के लिये शांता क्लाज की तरह मदद कर जाएंगे। 



अन्य समाचार