मऊ से बिछेगी पूर्वांचल को फतह करने की बिसात

23 Oct 2021

---सियासत---
-सुभासपा के स्थापना दिवस पर होगी सपा-भासपा गठजोड़ की घोषणा
-ओमप्रकाश राजभर की महापंचायत में मंच साझा करने आ रहे अखिलेश
-बदल सकते हैं कई सियासी समीकरण, सीटों के बंटवारे पर होगा मंथन

बृजेश यादव
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मऊ : यूपी से भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने की प्रमुख विपक्षी दल सपा की बिसात 27 अक्टूबर को मऊ से बिछेगी। हलधरपुर में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के स्थापना दिवस पर सपा-भासपा समेत कई अन्य छोटे दलों के गठजोड़ का ऐलान होगा। सुभासपा की महापंचायत में पार्टी प्रमुख पूर्व मंत्री ओमप्रकाश राजभर के न्योता पर सपा प्रमुख पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उनका मंच साझा करेंगे। पिछली बार भाजपा का अंग रही सुभासपा के इस बार सपा से गठबंधन के बाद पूर्वांचल की दो दर्जन से अधिक सीटों के समीकरण बदल जाएंगे। गठबंधन के ऐलान के बाद इसकी कयासबाजी लगने लगेगी कि मऊ, गाजीपुर, बलिया सहित पूर्वांचल के 22 जिलों में कहां-कहां भासपा, सपा व अन्य दलों के उम्मीदवार चुनाव लड़ सकते हैं।
2017 में बीजेपी के हिस्सा थे ओमप्रकाश
सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन के हिस्सा थे। उनसे गठजोड़ का भाजपा को व उन्हें भी फायदा मिला था। योगी नेतृत्व वाली भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बनाया गया। सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर को बाद में काफी कड़वे अनुभवों का सामना करने के बाद सरकार से अलग होना पड़ा था। अपने बेबाक बोल के कारण सुर्खियों में रहने वाले ओम प्रकाश राजभर ने अपनी बातचीत का दायरा ओवैसी की पार्टी, प्रसपा सहित सभी दलों तक खुले रखने का सिलसिला चला रखा था।
बसपा को छोड़ अन्य दलों से तालमेल की करते रहे बात
बसपा प्रमुख मायावती ने सभी 403 विधान सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर रखा है। इसलिए बसपा को छोड़कर बाकी सभी राजनीतिक दलों से गठबंधन करने का रास्ता खुला रहने की बात ओम प्रकाश राजभर करते रहे हैं। सपा प्रमुख का भी बराबर किया जाने वाला दावा उनसे मिलता - जुलता ही रहा। पिछले दिनों लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ हुई वार्ता के बाद सपा से गठबंधन को अंतिम रूप देने का निर्णय लिया गया। ओमप्रकाश राजभर ने मुलाकात के तत्काल बाद लखनऊ में प्रेस-कांफ्रेंस में इसका स्पष्ट संकेत दिया। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडिल से अखिलेश से मुलााकात की तस्वीर व वीडियो पोस्ट की थी। समाजवादी पार्टी के ट्विटर से भी पोस्ट किया गया।
सपा भी थी गठबंधन की इच्छुक
सपा भी इस चुनाव में छोटे दलों की अहमियत को भांपते हुए सुभासपा के साथ गठबंधन की इच्छुक थी। अब दोनों दलों के बीच गठबंधन होना पक्का हो गया है। जानकारों का कहना है कि इस बार भी अगर सपा और सुभासपा के गठबंधन के बाद कोई प्रत्याशी घोषित होता है तो संभव हो सदर विधायक मुख्तार अंसारी गठबंधन दल से मैदान में उतरें। वर्तमान में बसपा से विधायक मुख्तार अंसारी से पिछले दिनों मायावती ने किनारा करते हुए अपने प्रदेश अध्यक्ष, मऊ के ही रहने वाले और एक बार मुख्तार से कांटे की जंग लड़ चुके भीम राजभर को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। ऐसे में किसी परिस्थितिवश मुख्तार निर्दल भी मैदान में आते हैं तो सपा-भासपा गठबंधन का प्रत्याशी उनको और भाजपा दोनों को कड़ी टक्कर देने की स्थिति में होगा।
मऊ से ही की राजनीतिक कैरियर की शुरुआत
बता दें कि सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत मऊ जनपद से ही शुरु किया। पूर्व में रसड़ा विधान सभा के अंतर्गत आने वाले रतनपुरा ब्लाक में अपनी राजनीतिक गतिविधियों से उन्होंने राजनीति शुरु की। पिछली बार 2017 में हुए विधान सभा चुनाव में गठबंधन के चलते भाजपा ने सदर विधान सभा सीट, जिसमें रतनपुरा ब्लाक के गांव भी शामिल हैं, सुभासपा को दे दी थी। सदर विधान सभा सीट से ओपी राजभर ने अपने रिश्तेदार महेंद्र राजभर को टिकट दिया था।
महेंद्र राजभर ने दी थी मुख्तार को कड़ी टक्कर
मोदी लहर के उस चुनाव में भाजपा और सुभासपा के संयुक्त प्रत्याशी महेंद्र राजभर ने माफिया मुख्तार को कड़ी टक्कर दी थी। हालांकि महेंद्र को हार का सामाना करना पड़ा था। लेकिन कांटे की टक्कर की वजह से मुख्तार महज 8698 वोटों से जीत सके थे। मुख्तार को कुल 96793(36.62 प्रतिशत) वोट मिले थे जबकि महेंद्र राजभर को(33.33 प्रतिशत) 88095 मत मिले थे। सपा प्रत्याशी अल्ताफ अंसारी को तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा था, उन्हें 72016 (27.25 प्रतिशत ) वोट मिले थे।



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