मांसाहारी जीव सबसे ज्यादा स्वार्थी

19 Oct 2021

-मानव मूल्यों में गिरावट चिंता का विषय
-परोपकार करना ही जीवन का मूल सूत्र
-निःस्वार्थ मदद से अन्तरात्मा होती खुश

डा.गंगासागर सिंह
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मऊ : महाकवि तुलसीदास ने परहित सरिस धरम नहीं भाई के जरिये संदेश दिया है कि परोपकार से बढ़कर दूसरा कोई धर्म नहीं है, लेकिन यह निःस्वार्थ होना चाहिये। नेकी कर दरिया में डाल जैसा नहीं। किसी की निःस्वार्थ सहायता करिये और देखिये मन और अन्तरात्मा को कितनी खुशी मिलती है। वर्मातमान समय में मानव मूल्यों में गिरावट चिंता का विषय है।
स्वार्थ पूर्ति न होने पर आत्मग्लानि
परोपकारः परमो धर्मः के तर्ज पर निःस्वार्थ परोपकार की भावना का बहुत ही ज्यादा ह्रास हो गया है। इसके कारण सहायता करने वाले एवं लेने वाले के बीच परिस्थितियों के बदलने पर स्वार्थ एवं पूर्ति नहीं होने पर बहुत ही ज्यादा आत्मग्लानि होती है। कभी-कभी इसके हिंसात्मक परिणाम आते हैं।
मदद पाने वाला भी बन जाता है विरोधी
आज कल यह भी हो रहा है कि किसी व्यक्ति की जब तक आप सहायता करते रहते हैं, वह आपका गुणगान करता फिरता है। विषम परिस्थितिवश अगर आपने सहायता बंद कर दी तो वह आपका सबसे बड़ा विरोधी सिद्ध होता है।
मृगतृष्णा का शिकार है मनुष्य
परोपकार ही पृथ्वी लोक पर जीवन का मूल सूत्र है। मनुष्य ही सबसे ज्यादा स्वार्थी होने के साथ-साथ मृगतृष्णा का शिकार है। पृथ्वी लोक पर दो तरह के जीवन हैं। प्रथम वनस्पतियां एंव द्वितीय जन्तु। वनस्पतियां ही स्वतंत्र रुप से अपना भोजन प्रकाश, जल तथा पृथ्वी में उपलब्ध तत्वों से बना लेती हैं। अगर वनस्पतियां नहीं होतीं तो पृथ्वी लोक पर शाकाहारी जीवों का अस्तित्व नहीं होता। वनस्पतियां ही इस पृथ्वीलोक पर सबसे ज्यादा परोपकारी जीव हैं।
पहले उपकार, फिर स्वार्थ में हत्या
मांसाहारी जीव सबसे ज्यादा स्वार्थी हैं, उनमें भी इस पृथ्वीलोक पर मनुष्य योनि बहुत ही ज्यादा। मांसाहारी मानव भोज्य जीवों का लालन-पालन कर पहले उस पर परोपकार करता है, फिर उसकी हत्या कर अपनी स्वार्थ पूर्ति (भोजन) करता है। धन के पीछे भागने की बनती जा रही परिपाटी में संचय एवं संचय की मृगतृष्णा मनुष्य का एक अवगुण है, जो निःस्वार्थ परोपकार में बहुत बड़ा रोड़ा है। अंत में मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा रहा हूं कि परोपकार ही पृथ्वीलोक पर जीवन का मूल सूत्र है।(यह लेखक के निजी विचार हैं। लेखक इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मऊ के अध्यक्ष हैं।)



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