मऊ के मासूम के लिये वरदान बन गये राजीव राय

24 Aug 2021

-फेफड़े की खराबी से जूझ रहे हिमांशु के परिजन हो गये थे निराश
-बीएचयू की असमर्थता के बाद इलाज को आर्थिक तंगी के थे शिकार
-सपा सचिव को हुई जानकारी तो तारनहार बनकर उठा लिया बोझ

बुलंद आवाज ब्यूरो
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मऊ : फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे 10 वर्षीय मासूम हिमांशु यादव के लिये सपा प्रवक्ता व राष्ट्रीय सचिव राजीव राय वरदान बन गये। बच्चे को बचा पाने में बीएचयू ने भी असमर्थता जता दी थी। प्राइवेट अस्पताल में पड़ रही आर्थिक मार से उसके परिजन निराश हो गये थे। उसके बच पाने की आस ही छोड़ दिये थे। सपा सचिव राजीव राय को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने अपनी टीम वाराणसी के पापुलर हास्पिटल भेजी। इलाज में होने वाले लाखों के आर्थिक बोझ का सारा भार अपने कंधे पर ले लिया। इसका सुखद परिणाम यह हुआ कि 12 दिन तक वेंटिलेटर पर मौत से जूझने वाले हिमांशु को पुनर्जीवन मिल गया।
बीएचयू ने खड़े कर दिए हाथ
अब भला चंगा हो चुका हिमांशु यादव मधुबन क्षेत्र के रसूलपुर गौतम गांव निवासी राजेश यादव का पुत्र है। उसे फेफड़ों की बीमारी थी। परिजन बहुत दिनों से क्षेत्रीय चिकित्सकों के यहां दिखाये, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। हिमांशु की बहन श्वेता यादव काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्नातक की छात्रा है। उसने भाई का इलाज बीएचयू में कराने को कहा तो माह भर पहले परिजन वहां ले गये। बीएचयू में कुछ दिन तक इलाज चला, लेकिन बीमारी की गंभीरता को देखते हुए वहां के चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिये। उन्होंने उसके बचने की संभावना न के बराबर बताते हुए घर ले जाने को कहा। बहन व पिता हिमांशु को जिंदा लाश की तरह घर ले जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे।
निजी अस्पताल में चन्द दिन में ही खाली हो गये हाथ
कुछ लोगों के परामर्श देने पर वह उसे निजी अस्पताल पापुलर हास्पिटल ले गये। वहां शुरु हुआ इलाज इतना महंगा था कि उनके पास की रकम तीन-चार दिन में ही समाप्त हो गई। आगे इलाज करा पाने की उनकी सामर्थ्य नहीं थी। परिजनों को लगने लगा कि अब हिमांशु को कोई बचा नहीं सकता।
हिमांशु के परिजनों के समक्ष मुसीबत के मारे लोगों के मददगार राजीव राय का चेहरा घूमा। उनके मोबाइल पर संपर्क साध मदद की गुहार लगाई तो राजीव राय ने उन्हें ढांढस बंधाया। कहा, आप लोग इलाज कराओ हिमांशु को कुछ नहीं होगा। अगले दिन उनकी टीम वाराणसी उस अस्पताल में पहुंच प्रबंधन से बात कराई। सपा सचिव ने कहा कि जितना अच्छा उपचार हो सकता है करें, एडवांस के तौर पर रकम जमा करा रहा हूं। पूरा खर्चा मैं उठाऊंगा।
हिमांशु ने जीत ली जिन्दगी की जंग
उपचार कर रहे डा. कौशिक से सपा सचिव ने बात कर बेहतर से बेहतर ट्रीटमेंट देने को कहा। चिकित्सक ने बच्चे के महज दस फीसदी ही बचने की उम्मीद जताई, तब भी उन्होंने उसकी आखिरी सांस तक उपचार करने को कहा। इसका परिणाम यह हुआ कि 12 दिन तक वेंटिलेटर पर जूझने के बाद मौत के मुंह से हिमांशु बाहर हा गया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ्य है। पुनर्जीवन मिलने पर वह दो अंगुलियों से विक्ट्री (विजयी) की मुद्रा बनाकर बहुत खुश है। वह 25 अगस्त को डिस्चार्ज होकर घर आ जायेगा।
राय साहब हमारे लिये भगवान
हिमांशु के बचने की आस छोड़ चुके परिजन उसके खिलखिलाते हुए चेहरे को देख रहे हैं तो उनकी आंखों से मारे खुशी के निरंतर आंसू बह रहे हैं। उसकी बहन श्वेता यादव व परिवार के अन्य सदस्यों ने खुशी के आंसू लिये कहा कि राय साहब हम लोगों के लिये भगवान बनकर आये। अन्यथा हम सब तो लाखों रुपये खर्च कर इलाज कराने में असमर्थ थे।
खून का एक-एक कतरा कुर्बान : राजीव राय
सपा सचिव राजीव राय से बुलंद आवाज ने जब बात की तो उन्होंने कहा कि मेरा जिस्म व जान कर्मभूमि व जन्मभूमि में मानवता की सेवा के लिये कुर्बान भी हो जाये तो कोई फर्क नहीं है। बस इतना ही कहता हूं कि एक-एक सांस, एक-एक कतरा आये उनके काम।



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